लव जेहाद के बाद अब झारखंड पर लैंड जेहाद का खतरा
नहीं बचेंगी ज़मीनें तो हम फसलें कहाँ उगाएंगे
नहीं रही जो फसलें तो क्या रेत पका कर खाएंगे
अवसरवाद की सियासत करना जेएमएम सरकार की पुरानी आदत और फितरत रही है| सत्ता और कुर्सी की भूखी जेएमएम, स्थापना के समय से ही बिन पेंदी के लोटे की तरह, जिधर फायदा दिखा उधर लुढ़क जाती है| झारखण्ड मुक्ति मोर्चा उस पार्टी का नाम है जिसने विधानसभा के गलियारों तक पहुँचने के लिए आदिवासियों के मजबूत कन्धों का सहारा लिया और कुर्सी पर काबिज़ होते ही अब आदिवासियों के सरों को कुचलने पर आमादा है| जिस तरह ताजमहल बनाने के बाद शाहजहाँ ने मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे उसी तानाशाही के ज़रिये जेएमएम भी सत्ता हासिल करने के बाद आदिवासियों की बलि चढ़ाना चाहती है| इसका सबसे बड़ा और खूंखार उदाहरण है 'लैंड जेहाद'/ज़मीन जेहाद' पर सोरेन बाबू की चुप्पी| सोरेन साहब को चाहिए कि वो झारखण्ड में बढ़ रही बांग्लादेशी घुसपैठ और उनके (घुसपैठियों के) द्वारा आदिवासियों की ज़मीनें, धोखे और अन्य ग़लत तरीकों से हथिया लेने के बड़े पैमाने पर चल रहे इस खुले खेल पर आधिकारिक रूप से अपना रुख़ स्पष्ट करे| अगर सोरेन साहब सचमुच 'आदिवासियों के हितैषी' हैं, तो इन बांग्लादेशी घुसपैठियों को राज्य की सीमा से बाहर करने का क़ानून विधानसभा में पारित करवाएं| इस गंभीर मसले पर प्रदेश के मुखिया की चुप्पी उन्हें सवालों के घेरे में खड़ा कर रही है| आज ये बांग्लादेशी घुसपैठिए फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र यहाँ तक की पासपोर्ट भी बनवा ले रहे हैं और ये सब सोरेन साहब के राज में खुलेआम झारखण्ड में हो रहा है| गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक करीब सवा सौ (120) वेबसाइटें इस काम के लिए झारखंड से संचालित हो रही हैं|
पहले लव जेहाद, फिर लैंड जेहाद
ये सब कुछ एक पूरी सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है| पहले ये बांग्लादेशी घुसपैठिये लव जेहाद के ज़रिये झारखण्ड की आदिवासी लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाते हैं, फिर निकाह कर धर्म परिवर्तन करा लेते हैं| महज़ इतना ही नहीं, इसके बाद गिफ्ट डीड के ज़रिये आदिवासियों की ज़मीने अपने नाम करा लेते हैं| ये मामला कितना संगीन है, इसका अंदाज़ा गोड्डा से भाजपा सांसद के इस बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड में 100 के करीब महिलाएं, जो जनजातीय कोटे से अलग अलग जनप्रतिनिधि पदों के लिए चुनाव लडती हैं, जिनके पति मुस्लिम समुदाय से आते हैं| चिंता की बात ये भी है कि इनमे से कई मुस्लिम भारत में प्रतिबंधित संगठन PFI से भी जुड़े रहे हैं|
तुम्हारे पाँव के नीचे ज़मीन नहीं
कमाल है, फिर भी तुम्हें यकीन नहीं
हैरत ये है कि राज्य सरकार अभी भी खुद को 'आदिवासियों का हितैषी' मनवाने से बाज़ नहीं आ रही है| एक तरफ ये घुसपैठिये झारखण्ड में लगातार एक मिशन के तहत अपनी जनसँख्या बढ़ा रहे हैं| जिससे क्षेत्र की डेमोग्राफी में बदलाव आना शुरू हो गया है और आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट आन पड़ा है| दूसरी तरफ राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट में ये मान रही है कि ऐसी घुसपैठ के एक भी मामले अब तक संज्ञान में नहीं आये हैं| श्रीमान जी! आँखें बंद कर लेने से सिर्फ अँधेरा होता है, रात नहीं| सच्चाई से मुँह फेर लेने से सच्चाई नहीं बदल जाती| समस्या को नकारने की बजाय अगर समस्या का प्रभावी हल तलाशा जाए तो बेहतर हो सोरेन बाबू|
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