शीतली बयरिया शीतल दूजे पनीया कब देब देवता तू आके दरसनिया जोड़े जोड़े सूपवा आदित देव घटवा पे तीवई चढ़ावेले हो जल बिच खड़ा होई दर्शन ला आसरा लगावेले हो! सूर्य की स्वर्णिम किरणों में जब इस लोकगीत के बोल गूंजते हैं तब पूरा वातावरण भक्ति, अनुशासन और लोकश्रद्धा से भर उठता है। छठ पर्व केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवनदायिनी सूर्य शक्ति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। यह पर्व छठ माता, जल, मिट्टी और सूर्य इन चार तत्वों की एकात्म साधना है। हर वर्ष कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाने वाला यह पर्व अपने भीतर असीम संयम, श्रद्धा और लोकपरम्परा का भाव समेटे है। बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश से लेकर देश–विदेश तक फैला इसका उत्साह भारत की मजबूत सांस्कृतिक जड़ों को दिखाता है। आइए इस महापर्व से जुड़ी मान्यताओं और परम्पराओं के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करें। पहला दिन- नहाये खाए यह तैयारी का दिन माना जाता है । इसमें स्नान के बाद ही भोजन बनाना आरम्भ किया जाता है इसलिए इसे नहाये खाए के नाम से जाना जाता है । इस दिन शरीर और मन दोनों की ही शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है । इस दि...
The "Bhārat Gaṇarājya" (भारत गणराज्य Bhārat Gaṇrājya (Hunterian), short: Bhārat, also spelled as Bhārata) and its transliteration "Republic of India" (short: India) are the official names adopted by the Government of India in the Hindi and English languages respectively.[1] The official names as set down in article 1 of the Indian constitution are: Hindi: भारत (Bhārat) English: India