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युवाओं के हक की नौकरी क्यों बेच रहे सरकार

 



युवाओं के हक की नौकरी क्यों बेच रहे सरकार

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की मौजदा सरकार चुनाव के समय तो युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर काम करने के बड़े बड़े वादे करती है पर चुनाव के बाद इन दावों की पोल खुलने में ज्यादा देर नहीं लगती और ये सारे वादे खोखले साबित हो जाते हैं|

·       हर साल 5 लाख नौकरियां देने का झारखंड सरकार का वादा भी महज़ हाथी का दांत साबित हुआ| युवाओं को नौकरी देने के अपनी महत्वाकांक्षी मोर्चे पर झारखण्ड सरकार पूरी तरह से फेल साबित हुई है|

·       सिपाही भर्ती की दौड़ में तो सरकार पहले ही पूरे देश में अपनी थू-थू करा चुकी है| रही सही कसर ये पेपर लीक का मुद्दा पूरी कर रहा है| बीते शनिवार और रविवार को राज्य में आयोजित जेएसएससी सीजीएल की परीक्षाओं को पूरी चाक चौबंद और मुस्तैदी से कराए जाने का दावा कर एक ओर तो सरकार ख़ुद अपनी पीठ थपथपा रही है|

·       पर इस परीक्षा के दौरान पूरे राज्य में इंटरनेट का बंद किए जाने का झारखण्ड सरकार का हैरतंगेज़ फैसला झारखंड सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है| हो न हो पर्दे के पीछे कोई न कोई बड़ा खेल ज़रूर चल रहा है| जिस पर पर्दा डालने के लिए ही पूरे राज्य में एक साथ इंटरनेट की सेवाएं ठप्प कराई गयी|

·       ये बात खुद परीक्षा में शामिल हुए कुछ अभ्यर्थी कह रहे हैं| दरअसल इन छात्रों का आरोप है कि जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा में कुछ प्रश्न ऐसे थे जो पूर्व में हुई एसएससी सीजीएल की परीक्षाओं से पूरी तरह मेल खाते थे| हाल में हुई इस परीक्षा के रीजनिंग के 20 में से 16 प्रश्न साल 2018-19 की एसएससी सीजीएल के प्रश्नपत्र से काफी मिलते जुलते थे| वहीं जेएससी सीजीएल के गणित के प्रश्नपत्र के 20 में से 16 प्रश्न एसएससी सीबीटी परीक्षा के 2022 के प्रश्नपत्र के काफी हद तक मिलता जुलता था|       

·       इन अभ्यर्थियों का आरोप है कि पैसे लेकर चुनिन्दा लोगों को इन प्रश्नों की जानकारी पहले से दे दी गयी थी| ताकी वो पहले से इन प्रश्नों की तैयारी कर सकें| अभ्यर्थियों का आरोप है कि ये सारा खेल झारखंड सरकार की नाक के नीचे हो रहा था, तो ऐसा संभव ही नहीं है कि सरकार को इसकी जानकारी न रही हो|

·       छात्रों का आरोप है कि झारखंड सरकार की शय पर हमारे हक की नौकरियों को अन्य लोगों को बेच दिया| ये हम मेहनतकश छात्रों के साथ सरासर अन्याय है| 

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