* चिंता हरण मन्त्र * आनन्द कर निज रूप में, चिन्ता अग्नि में क्यों जरं । जो हो गया सो हो गया, पश्चाताप कर कर क्यों मरै । जो हो रहा सो हो रहा, आगे की चिन्ता क्यों करै । तू सत्य है तू नित्य है, जो नाश है निश्चय मरे ||१|| संतुष्ट होगा जो कभी, वह देह का पोषण करे । यदि रुष्ट होगा वह कभी, तो देह का शोषण करें । मन देह इन्द्री पार तू, आशा किसी की क्यों करे । है मार सकता देह को, तन पार फिर तू क्यों डरें ॥२॥ यदि द्व ेष कर्ता है कहीं, तो आपने से कर रहा । यदि प्रेम करता है कहीं, तो आपने से कर रहा । फल प्रेम का सुख द्व ेष का दुःख, प्राप्त कर जन्मै मरे । कर्त्ता न बन भोक्ता न बन, सुख दुःख में फिर क्यों परै ३ संसार के व्यवहार को, तू स्वप्न जैसा जान ले । संसार के व्यवहार में, जो लिप्त सोया मान ले । तू जाग जा निज रूप में, सोये की संगति क्यों करें । तू जागता जीता भला, फिर संग मुर्दा क्यों धरै ॥४॥ आदर्श रख मुनि सन्त का शुरु दत्त का सनकादिका । या राम का या कृष्ण का, गांधी तथा जनकादिका । कुत्ता गधा बन्दर तथा सूकर नकल तू क्यों करें । सिख मान गँवानन्द का, तू आत्म का चिन्तन करे ||५|| *Worry removal mantra* ...
The "Bhārat Gaṇarājya" (भारत गणराज्य Bhārat Gaṇrājya (Hunterian), short: Bhārat, also spelled as Bhārata) and its transliteration "Republic of India" (short: India) are the official names adopted by the Government of India in the Hindi and English languages respectively.[1] The official names as set down in article 1 of the Indian constitution are: Hindi: भारत (Bhārat) English: India