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नल जल योजना का कार्यान्वयन क्यूँ नहीं करा पायी झारखंड सरकार

 

नल जल योजना का कार्यान्वयन क्यूँ नहीं करा पायी झारखंड सरकार

 

यहां तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियां

मैं जानता हूं पानी कहां ठहरा हुआ होगा

 

रांची की सड़कों से उतर कर जैसे ही आप गांव-कस्बों की पगडंडियां पकड़ेंगे, असली झारखंड आपको यहीं दिखेगा। यहीं आपको पता चलेगा कि राज्य की बड़ी आबादी कैसे पीने के पानी के लिए तरस रही है। नल जल योजना के नाम पर हजारों करोड़ रूपये केंद्र सरकार की ओर से भेजे जाते हैं पर झारखंड तक पहुँचते पहुँचते इस योजना का पानी भ्रष्टाचार के रेगिस्तान में सूख जाता है चूँकि इन पैसों से झारखंड के कई बड़े अधिकारियों और मंत्रियों की प्यास बुझती है, इसलिए इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ख़ामोशी का सबब आसानी से समझ आता है। ये कहना ग़लत नहीं होगा कि झारखंड सरकार ने गरीबों की प्यास का सौदा कर लिया है।

 

राज्य सरकार की लापरवाही से औंधे मुंह गिरी है नल-जल योजना

 

*     आधिकारिक आंकड़ों की माने तो राज्य में नल जल योजना का अभी मात्र 54 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। झारखंड में कुल 62.30 लाख घर हैं जिनमें से लगभग 34 लाख घर अभी भी नल-जल योजना के लाभ से वंचित हैं। हालांकि, ज़मीनी हकीकत इससे भी बदतर है।

 

*     आंकड़ों की गहनता में जाएं तो पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार की ओर से नल जल योजना के लिए करीब 574 करोड़ रूपये आवंटित किये गये थे जिसे अगले वित्तीय वर्ष यानी 2021-22 में बढ़ा कर करीब 2479 करोड़ रूपये कर दिया गया था ये धनराशि आम जनता की प्यास बुझाने के लिए तो काफी थी पर राज्य सरकार के अधिकारियों और मंत्रियों की जेब भरने के लिए नहीं नतीजतन ये धनराशि भ्रष्टाचार के ब्लैक होल में चली गयी

 

*     केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने झारखंड के लिए नल जल योजना का बजट 4 गुना तक बढ़ा दिया था इस एवज़ में झारखंड सरकार ने साल 2024 तक नल जल योजना के लक्ष्य को प्राप्त कर लेने का भरोसा जल शक्ति मंत्रालय को दिया था

 

*     परन्तु भरोसे को तोड़ने में निपुण झारखंड सरकार आज यानी साल 2024 में इस लक्ष्य के आस पास भी नहीं है परिणामस्वरूप झारखंड वासी पानी जैसी महत्वपूर्ण और आधारभूत ज़रुरत के लिए तरस रहे हैं

 

बूँद-बूँद पानी को तरस रही जनता पर अपनी ही पीठ ठोक रही राज्य सरकार

 

*     रामगढ़ ज़िले के गोसी गांव स्थित परसाटांड बस्ती में मौजूद सात-आठ सौ घरों में से मात्र 20-25 घरों में ही नल-जल योजना का कनेक्शन पहुंचा है। ये आंकड़े प्रदेश सरकार को शर्मसार करने के लिए काफी हैं।

 

*     रांची शहरी क्षेत्र में स्थित चापू टोली में तो नल जल योजना के तहत पाइपलाइन बरसों पहले बिछ जाने के बावजूद पानी की सप्लाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

 

*     नल जल योजना के तहत निरसा से गोविंदपुर के बीच 439 गांवों में रहने वाले कुल 6.5 लाख लोगों के घर भी पानी पहुंचाने का लक्ष्य था, जो अभी भी अधर में है।

 

 

*     राजधानी की बढ़ती आबादी को देखते हुए कम से कम 45 जल मीनार की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक 25 जल मीनार ही बनाये गये हैं। इसके अलावा जहां पर एक साल पहले पाईप लाइन बिछा दी गयी थी, वहां भी अभी तक सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है।

 

*     ऐसे गाँवों की तो कोई गिनती ही नहीं जहां नल जल योजना के तहत लगाए गये हैंडपंप की, एक बार खराब हो जाने के बाद दोबारा मरम्मत नहीं कराई जाती

 

 

*     झारखंड के गिरडीह ज़िले के अंतर्गत तिसरी प्रखंड मुख्यालय से सटे तिसरी चौक से चिलगीली, केन्वटाटांड, भुराई रोड तक की लगभग 2 हजार से अधिक जनसंख्या जल संकट से जूझ रही है। औरतों को कई किलोमीटर तक पानी ढो कर ले जाना पड़ता है। कहने को तो गाँव में पानी की टंकी है पर उसमें पानी की सप्लाई शुरू न होने की वजह से फिलहाल वो देखने की चीज़ के सिवा और कुछ भी नहीं है

 

*     ये कुछ गाँव के उदाहरण तो महज़ एक बानगी भर हैं कि किस तरह नल जल योजना के नाम पर केंद्र से भेजे गये रुपयों का इस्तेमाल सरकार अपनी जेबें भरने के लिए कर रही है

 

*     झारखंड सरकार के लापरवाही भरे रवैये का खामियाजा जनता को अपनी प्यास से समझौता कर चुकाना पड़ रहा है। राज्य में आए दिन जगह-जगह से पानी की किल्लत की ख़बरें आती रहती हैं। हालाँकि राज्य के पेयजल और स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर खुद अपनी पीठ थपथपाने से बाज़ नहीं आ रहे उनके मुताबिक 50 फीसदी घरों तक योजना की पहुँच भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है

 

 

शायद यहीं ठहरा है पानी

 

*     बीते दिनों चेन्नई की एक कंपनी श्रीराम इसीपी को काम में लापरवाही बरतने के आरोप में झारखंड में डीबार कर दिया गया था। बाद में इसी कंपनी को झारखंड के पेयजल विभाग ने फिर से 400 करोड़ का कांट्रेक्ट दिया है।

 

*     कम्पनी ने 400 करोड़ के इस काम को पूरा करने की समय सीमा मार्च 2026 तय की है जबकि जल जीवन मिशन योजना दिसम्बर 2024 में ही खत्म हो रही है।

 

जो सरकार अपने नागरिकों के लिए पानी जैसी आधारभूत आवश्यकता की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर सकती उसे कुर्सी पर बने रहने का क्या हक है?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अबुआ राज में नल जल योजना धराशाई

*     नल जल योजना को कुल 61 लाख घरों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया था पर आज भी 34 लाख घर आज भी इस योजना के लाभ से वंचित हैं| जहाँ पाइपलाइन कई साल पहले बिछ चुकी हैं, वहां तक भी नहीं पहुंचा पानी 

 

*     रांची में आबादी के हिसाब से 45 जल मीनारों की है ज़रुरत पर असलियत में है केवल 25

*     जल जीवन मिशन के तहत 9544 करोड़ की राशि जारी की गयी थी, पर अधर में लटका है काम| दूसरी योजनाओं में खर्च कर जाती है राशि 

 

हेमंत जी ! देखिये आपके राज में क्या हो रहा है

 

“इंस्पेक्टर साब.....मेरे पति ने कराया है 10-12 महिलओं का धर्म परिवर्तन, मुझे बचाइये”

 

*     बरियातू थाना क्षेत्र निवासी आदिवासी महिला पैमलीना हेमरोम ने अपने ही पति फ़िरोज़ आलम  के खिलाफ थाने में दर्ज कराई है शिकायत

 

*     अब तक 10-12 महिलाओं से शादी कर, करा चुका है उनका धर्म परिवर्तन| चार बीवियों के साथ रहता है घर में|

 

*     जातिसूचक शब्दों से करता है अपमानित| जान से मारने की भी दी है धमकी|

 

 

 

 

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