शीतली बयरिया शीतल दूजे पनीया कब देब देवता तू आके दरसनिया जोड़े जोड़े सूपवा आदित देव घटवा पे तीवई चढ़ावेले हो जल बिच खड़ा होई दर्शन ला आसरा लगावेले हो! सूर्य की स्वर्णिम किरणों में जब इस लोकगीत के बोल गूंजते हैं तब पूरा वातावरण भक्ति, अनुशासन और लोकश्रद्धा से भर उठता है। छठ पर्व केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवनदायिनी सूर्य शक्ति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। यह पर्व छठ माता, जल, मिट्टी और सूर्य इन चार तत्वों की एकात्म साधना है। हर वर्ष कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाने वाला यह पर्व अपने भीतर असीम संयम, श्रद्धा और लोकपरम्परा का भाव समेटे है। बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश से लेकर देश–विदेश तक फैला इसका उत्साह भारत की मजबूत सांस्कृतिक जड़ों को दिखाता है। आइए इस महापर्व से जुड़ी मान्यताओं और परम्पराओं के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करें। पहला दिन- नहाये खाए यह तैयारी का दिन माना जाता है । इसमें स्नान के बाद ही भोजन बनाना आरम्भ किया जाता है इसलिए इसे नहाये खाए के नाम से जाना जाता है । इस दिन शरीर और मन दोनों की ही शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है । इस दि...
Well planned interview by #CEO Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board Katra J&K in seven star hotel सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हमारे हिंदू शास्त्र के अनुसार हर एक मंदिर पूरे विश्व में रात को आरती करके भगवान जी को भोग लगाकर बंद कर देते हैं और सुबह फिर आरती के साथ भोग लगाते हैं फिर मंदिर में सब लोग दर्शन करते हैं । लकिन #CEO और पूरी दुनिया रात को सोती है लकिन बड़े दुःख की बात है ये धर्म के ठेकेदार माता रानी जी जो इस पवित्र स्थान पर तपस्या कर रही हैं उन्हें रात को भी अपने लालच के चलते मंदिर बंद नहीं करते कभी जबसे से यह ट्रस्ट बना हुआ हैं और धर्म के नाम पर लोगों की आस्था का अपमान कर रहा है । इन्होंने माता रानी की हज़ारों साल पुरानी मूर्तियां और आभुषण भी गायब कर दिए चेयरमैन साहब की आड़ में लकिन कोन इनको पूछे । प्राचीन माता वैष्णो देवी जी की गुफा को तोडा और 4 गुफा बनायी अपने बिज़नेस के लिए हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ । हिंदू विरोधी षड्यंत्र किया और हिन्दू बारिदार लोगों को निकाला और आज तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई । माता वैष्णो देवी जी बारीदार लोगों की कुल देवी है लकिन उनको आजतक ...