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झारखंड में खतरे में है, रोटी, बेटी और माटी

 

झारखंड में खतरे में है, रोटी, बेटी और माटी

 

*    असल मुद्दों से ध्यान भटकाने में माहिर, तथाकथित ‘आदिवासियों की हितैषी’ सरकार ने अपने सहयोगी दलों की मदद से, अपनी आँखों पर वोटबैंक और मुस्लिम तुष्टिकरण की जो पट्टी बांध रखी है, उसका दुष्परिणाम झारखंड की पहचान पर संकट के रूप में सामने आ रहा है। यही असल वजह है कि सरकार को झारखंड की असल समस्याएँ दिख नहीं रही हैं।

 

*    जल, जंगल और ज़मीन का ये राज्य आज अपनी रोटी, बेटी और माटी के लिए हक की लड़ाई लड़ने को मजबूर है। ‘अबुआ राज’ में आज औरत की अस्मिता सुरक्षित नहीं है, युवाओं को रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं आदिवासियों की ज़मीनें आज घुसपैठियों द्वारा जबरन हड़पी जा रही हैं, पर सत्ता इस संवेदनशील मुद्दे पर भी खामोश है।     

 

दो ‘रोटी’ की भूख ले जा रही वतन से दूर

 

कवि दुष्यंत कुमार ने लिखा था

 

भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या

आज कल जलसों में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ

 

*    आज झारखंड की सरकार भी राज्य के नौजवानों ने यही कहती दिख रही है। हर साल 5 लाख नौकरी देने का वादा करने वाले दल के मुखिया अपने पुराने वादे से पलटी मारकर झारखंड का बेड़ा गर्क कर युवाओं को बीच मंझधार में छोड़ दिया है।

 

*     अधिक बेरोज़गारी के मामले में देश में झारखंड 18% के साथ पांचवें स्थान पर है। बेरोज़गारी के दावन ने झारखंड के युवाओं की उम्मीदों को खंड खंड कर दिया है। सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकोनोमी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि ग्रामीण महिलाओं की अपेक्षा शहरी महिलाओं में बेरोज़गारी की दर अधिक है। ग्रामीण महिलाओं में बेरोज़गारी की दर 5.1 फीसदी है वहीँ शहरी महिलाओं में ये 11.5 फीसदी के करीब है।

रिकॉर्डतोड़ बेरोज़गारी के बावजूद भरे नहीं जा रहे सरकारी पद

*     आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में कुल 466494 सरकारी पद हैं जिसमें 287129 पद अभी भी रिक्त हैं। राज्य सरकार सिविल सेवा आयोग पिछले पांच वर्षों में केवल 1 ही सरकारी परीक्षा संपन्न करा पाई है जिसमें महज़ 257 अफसरों की ही नियुक्ति हो पाई। इसके अलवा नगरपालिका सेवा संवर्ग और कृषि पदाधिकारी समेत कई ऐसे पद हैं जिनकी या तो परीक्षाएं अभी तक नहीं हुई हैं या फिर परिणाम अभी तक नहीं आए हैं।

 

*     झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का पद भी बीते 22 अगस्त से रिक्त है। इसके अलावा 13 सिविल सर्विसेज की परीक्षाएं ऐसी हैं जिनकी मेंस परीक्षा हुए 2 माह से ज्यादा का समय हो चुका है पर उनके परिणाम अभी तक जारी नहीं किये गये। इसके अलावा हाल ही में संपन्न हुई जेएसएससी सीजीएल परीक्षाएं भी सवालों के घेरे में है।

 

*     आज झारखंड के युवाओं का कोई खैर-ख्वाह नहीं है। उन्हें अपने राज्य में नौकरी के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। इसलिए निराश होकर वे दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं।

 

‘बेटियों’ की सुरक्षा के मोर्चे पर नाकाम है झारखंड सरकार

*    वर्तमान झारखंड सरकार राज्य की आधी आबादी की अस्मिता की रक्षा कर पाने में पूरी तरह से असफल साबित हो रही है। महिलाओं को उनका हक दिलाने का दंभ भरने वाली इस सरकार के राज में महिलाओं पर होने अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं, जो कि चिंता का सबब है। लेकिन अपने मद में चूर झारखंड सरकार के माथे पर चिंता की लकीर तक नहीं है।

 

*     पिछले पांच वर्षों में झारखंड में दुष्कर्म की 14162 घटनाएं दर्ज की गयीं। ज़िलेवार बात करें तो बोकारो में 762, चाईबासा में 497, देवघर में 446, धनबाद में 1021, दुमका में 318, गढ़वा में 897, गिरिडीह में 925, गोड्डा में 669, गुमला में 605, हजारीबाग में 967, जमशेदपुर में 740, जामताड़ा में 198, खूंटी में 237, कोडरमा में 281, लातेहार में 384, लोहरदगा में 416, पाकुड़ में 357, पलामू में 704, रेल धनबाद में पांच, रेल जमशेदपुर में तीन, रामगढ़ में 318, रांची में 1484, साहिबगंज में 872, सरायकेला में 295 और सिमडेगा में 323 रेप के मामले दर्ज किए हैं।

 

लव और लैंड जेहाद के ज़रिये ‘माटी’ पर संकट

*     वर्तमान झारखंड सरकार समय समय पर आदिवासियों के हितैषी होने के दावे करती रहती है। मगर सच तो ये है कि आज बंगलादेशी घुसपैठ का मुद्दा इन आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट बन कर खड़ा हुआ है। अगर समय रहते इस घुसपैठ को नहीं रोका गया तो झारखंड में आदिवासी एक विलुप्तप्राय प्रजाति होकर रह जाएगी।

 

*     ये बांग्लादेशी घुसपैठिए फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र यहाँ तक की पासपोर्ट भी बनवा ले रहे हैं और ये सब सोरेन साहब के राज में खुलेआम झारखण्ड में हो रहा है गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक करीब सवा सौ (120) वेबसाइटें इस काम के लिए झारखंड से संचालित हो रही हैं

*     ये बांग्लादेशी घुसपैठिये पहले लव जेहाद के ज़रिये झारखण्ड की आदिवासी लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाते हैं, फिर धर्म परिवर्तन करा कर निकाह कर लेते हैं इसके बाद गिफ्ट डीड के ज़रिये आदिवासियों की ज़मीने अपने नाम करा लेते हैं

 

*     ये मामला कितना संगीन है, इसका अंदाज़ा गोड्डा से भाजपा सांसद के इस बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड में 100 के करीब महिलाएं, जो जनजातीय कोटे से अलग अलग जनप्रतिनिधि पदों के लिए चुनाव लडती हैं, जिनके पति मुस्लिम समुदाय से आते हैं चिंता की बात ये भी है कि इनमे से कई मुस्लिम भारत में प्रतिबंधित संगठन PFI से भी जुड़े रहे हैं

 

मौजूदा सरकार माने न माने, इस वक़्त झारखंड का सबसे ज्वलंत मुद्दा यही है। अगर झारखंड के अस्तित्व को बचाना है तो ‘रोटी-बेटी-माटी’ की हिफाज़त करनी होगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

झारखंड में खतरे में है

रोटी, बेटी और माटी

रोटी

*   हर साल 5 लाख नौकरियों का वादा करने वाली सरकार में, रोज़गार कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में महज़ 5544 युवाओं को नौकरी मिल सकी है|

*   जबकि सबसे ज्यादा बेरोज़गारी के मामले में झारखंड 18% की दर के साथ 5वें पायदान पर है|

*     ग्रामीण महिलाओं में बेरोज़गारी की दर 5.1 फीसदी है वहीँ शहरी महिलाओं में ये 11.5 फीसदी के करीब है।

*   मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ झारखंड की कुल आदिवासी और दलित आबादी का 35% हिस्सा आज पलायन को मजबूर है|

*   पलायन करने वाली आबादी में 55% महिलाएं, 30% पुरुष और 15% बच्चे शामिल हैं|

 

बेटी  

*    आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में झारखंड में महिलाओं के साथ दुष्कर्म की 14162 घटनाएं दर्ज की गयीं। सबसे ज्यादा घटनाएं, राजधानी रांची समेत हजारीबाग, गढ़वा और गिरडीह में दर्ज की गयी हैं|

*      बोकारो में 762, चाईबासा में 497, देवघर में 446, धनबाद में 1021, दुमका में 318, गढ़वा में 897, गिरिडीह में 925, गोड्डा में 669, गुमला में 605, हजारीबाग में 967, जमशेदपुर में 740, जामताड़ा में 198, खूंटी में 237, कोडरमा में 281, लातेहार में 384, लोहरदगा में 416, पाकुड़ में 357, पलामू में 704, रेल धनबाद में पांच, रेल जमशेदपुर में तीन, रामगढ़ में 318, रांची में 1484, साहिबगंज में 872, सरायकेला में 295 और सिमडेगा में 323 रेप के मामले दर्ज किए हैं।

 

माटी

*   अकेले झारखंड से हल साल आती हैं लव जिहाद की एक दर्जन से ज्यादा घटनाएं| आदिवासी महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन करा, बंगलादेशी घुसपैठिये कर लेते हैं निकाह| फिर हथिया लेते हैं ज़मीन

*   महिलाओं द्वारा विरोध करने पर करा दी जाती है उनकी हत्या| साल 2022 में साहिबगंज की रबिका पहाड़न को, दिलदार अंसारी नाम के युवक द्वारा 50 टुकड़ों में काट दिया गया था|

*   मो. ज़ियाउल नाम के एक युवक ने नाबालिक छात्रा का अश्लील विडियो बनाकर उसपर निकाह का दबाव डालता था|

*   गढ़वा में अंकिता सिंह को शाहरुख़ व नईम नाम के दो लड़कों ने जला दिया गया था जिंदा| 

*   ये घुसपैठिये गिफ्ट डीड के ज़रिये हड़प लेते हैं आदिवासियों की ज़मीनें| ज़मीन पर बनाए जाते हैं मदरसे, मस्जिद और कब्रिस्तान| अवैध हथियार बनाने के लिए भी किया जाता है इस्तेमाल|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

*   युवाओं का पलायन रोकने में विफल सरकार, बेरोज़गारी दर में अव्वल झारखंड में दो वक़्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे युवा

*   बेटियों के आसुओं से भी नहीं पसीज रहा सरकार का दिल| दुष्कर्म की नहीं कम हो रही वारदात|

*   लव जिहाद का सहारा लेकर जबरन कराया जा रहा है आदिवासी बेटियों का धर्म परिवर्तन

*   बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर झारखंड सरकार की ख़ामोशी से बढ़ता जा रहा है आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट| घुसपैठिये कर रहे जबरन आदिवासियों की ज़मीनों पर कब्ज़े

 

 

 

 

 

 

 

 

सोरेन बाबू, आपके राज में ये क्या हो रहा है?

 

*    झारखंड से आदिवासियों का अस्तित्व मिटाने की हो रही साजिश|

*    अवैध रूप से बांग्लादेशी घुसपैठियों को झारखंड में कराया जा रहा है दाखिल|

*    पहले ये घुसपैठिये आदिवासी महिलाओं को फंसाते हैं अपने प्यार के जाल में

*    फिर धर्म परिवर्तन करा करते हैं निकाह

*    गिफ्ट डीड के ज़रिये बड़े पैमाने पर आदिवासियों की ज़मीनें हथियाने का चल रहा है खेल|

*     इन ज़मीनों पर मदरसे, मस्जिद और कब्रिस्तान ही नहीं अवैध हथियार भी बनाये जा रहे हैं|

*    पत्नी को राजनीति में उतार कर, पावर का कर रहे गलत इस्तेमाल|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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