मानव तस्करी: एक समस्या जो बन गयी नासूर
ये वो दौर है जिसमें इंसान ही इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है| मानव तस्करी की अमानवीय घटनाएं इसका सबसे बड़ा
प्रमाण है| हालाँकि इससे भी ज़्यादा अमानवीय, इन घटनाओं पर हुक्मरानों की ख़ामोशी है| झारखंड में
मानव तस्करी के आंकड़े कम होने का नाम नहीं ले रहे पर झारखंड सरकार का इस समस्या को
लेकर मूकदर्शक बने रहना अब नीति का नहीं बल्कि नियत का प्रश्न बनता जा रहा है|
· मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड
में पिछले पाँच सालों में मानव तस्करी के 656 मुकदमे दर्ज किये गये हैं| जिसके मुताबिक कुल 1574 लोग मानव तस्करी की घटनाओं के शिकार हो चुके
हैं|
· आंकड़ों की और ज्यादा गहराई में जाने पर
पता चलता है कि इसमें 18
साल से कम उम्र की यानी नाबालिग़ लड़कियों की संख्या 717 है जबकि 18 साल साल से अधिक यानी बालिग़ लड़कियों की संख्या
309 है| वहीं 18 साल से कम उम्र के युवकों की संख्या 332 है जबकि बालिग़ युवकों की संख्या 216 है|
· उक्त में से झारखण्ड पुलिस ने 1474 लोगों को बरामद कर लिया है जिसमें से 473 युवक और 1001 युवतियाँ और महिलाएं शामिल हैं| जबकि 100 के करीब लोग अभी भी लापता हैं|
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झारखंड पुलिस ने अब तक कुल 783 तस्करों को गिरफ्तार किया है| इसमें 197 महिलाएं और 586 पुरुष हैं|
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पिछले पाँच वर्षों में सबसे ज्यादा 212 लोग सिमडेगा में मानव तस्करी के शिकार हुए हैं| इसके अलावा पिछले साल मानव तस्करी के सबसे
ज्यादा केस गुमला, सिमडेगा, खूंटी, साहिबगंज और रांची में आये हैं|
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जनजाति कल्याण शोध संस्थान और बाल
कल्याण संघ द्वारा किये गये एक संयुक्त शोध में ये आंकड़ा भी निकल कर सामने आया है
कि तस्करी के तहत बेचीं जाने वाली 90 फीसदी महिलाएं आदिवासी जबकि शेष 10 फीसदी
महिलाएं दलित समुदाय से आती हैं|
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मानव तस्करी की शिकार इन लोगों में
लगभग 30 फीसदी मैट्रिक पास, 30 फीसदी मिडिल, 14 फीसदी प्राइमरी पास और लगभग 26
फीसदी लोग निरक्षर होते हैं|
सस्ती दरों पर मजदूरी और वेश्यावृत्ति तक में
होता है इस्तेमाल
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TRI की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन
महिलाओं को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब सहित पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, असम आदि
राज्यों में भेजा जाता है|
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हरियाणा व पंजाब में इन्हें जबरदस्ती
शादी के उद्देश्य से बेचीं जाती हैं| जबकि अन्य राज्यों में इन्हें घरेलू काम के
उद्देश्य से प्लेसमेंट एजेंसियों को बेच दिया जाता है|
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इसके अलावा उत्तर प्रदेश में कालीन व
चूड़ी उद्योग में काम करने के इन लड़कियों को झारखंड से लाया जाता है| एक आंकड़े के
मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग में पलामू गढ़वा ज़िले के 11 हज़ार बाल मजदूर
कार्यारत हैं|
नक्सलों से बचने के लिए फंस जाते हैं तस्करों के
चक्कर में
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खासतौर से झारखंड की बात करें तो कई
मामलों में देखा गया है कि अक्सर लोग नक्सलों से तंग आकर तस्करों के चंगुल में फंस
जाते हैं| ये तस्कर उन्हें शहर में काम दिलाने का वादा करते हैं और शहर ले जाकर
उनका सौदा कर देते हैं|
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तस्करी के माध्यम से बेचीं गयी
महिलाओं के एक बहुत बड़े तबके को वेश्यावृत्ति की तरफ धकेल दिया जाता है|
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बेरोज़गारी, गरीबी और अशिक्षा तो इस
तरह की घटनाओं के प्रमुख कारण हैं ही|
झारखंड
में मानव तस्करी की कुछ सनसनीखेज़ घटनाएं
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जून 2023 को दिल्ली के राजौरी गार्डेन स्थित एक
घर में घरेलू सहायक का काम करने वाली 16 वर्षीय किशोरी की मौत हुई थी| ये युवती कुरडेग प्रखंड की हेमठा पंचायत के भिजरीबारी
गाँव की रहने वाली थी जिसे सेमरबेड़ा निवासी अजय लाकड़ा जबरदस्ती बहलाकर दिल्ली ले
आया और लाकर बेंच दिया|
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इसी साल अगस्त में ऐसे ही एक बच्चे
को दिल्ली से रेस्क्यू किया गया| ये बच्चा 10 साल पहले साहिबगंज से मानव तस्करों
के हत्थे चढ़ा था|
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पिछले साल अगस्त में मानव तस्करों
द्वारा साहिबगंज की ही 9 युवतियों को दिल्ली एनसीआर से रेस्क्यू किया गया था|
युवतियों ने बताया कि इन्हें बेहतर जीवन का झांसा देकर दिल्ली ले जाया जा रहा था|
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इसी साल फ़रवरी में साहिबगंज की पाँच
बच्चियों और गोड्डा ज़िले के एक बालक को दिल्ली से मुक्त कराया गया| इस मामले में
एक महिला को हिरासत में भी लिया गया है|
सरकार को चाहिए कि इस मसले के स्थाई समाधान खोजने
की दिशा में गंभीरता असे प्रयास करे ताकि कोई कंक्रीट हल मिल सके|
मानव तस्करी पर शर्मनाक है हुक्मरानों की खामोशी
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पिछले 5 सालों में 1574 लोग हुए हैं
मानव तस्करी की घटनाओं के शिकार
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करीब सौ लोगों का अभी भी पता नहीं
लगा पाई है पुलिस
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गुमला, सिमडेगा, साहिबगंज, खूंटी और
रांची से लापता होते हैं सबसे ज्यादा लोग
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जबरन शादी, बेगारी और वेश्यावृत्ति
के मकसद से होती है तस्करी
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