अपराध के मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम झारखंड सरकार
सरकार नहीं कस रही अपराधियों पर नकेल
पुलिस प्रशासन भी हो रहा पूरी तरह फेल
· झारखण्ड में लगातार बढ़ रही आपराधिक
घटनाओं से अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं| ये कोई और नहीं सरकारी आंकड़े कह रहे हैं| दिसंबर 2023 में झारखण्ड सरकार द्वारा जारी
किये गये आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में कुल 48 हज़ार से अधिक आपराधिक मामले दर्ज
किये गये हैं|
इस पर हैरान मत होइए| हैरत की बात तो ये है कि 48 हज़ार में से महज़
4172 मामलों का ही निपटारा हो पाया है| यानी कि केवल 10 प्रतिशत के आस पास| इसे अगर झारखंड पुलिस प्रशासन की सुस्ती न कहा
जाए तो फिर क्या कहा जाए| प्रदेश
में बढ़ते अपराध के बावजूद प्रदेश की सत्ता में बैठे लोगों के माथे पर बल नहीं पड़
रहा| प्रदेश की गिरती क़ानून व्यवस्था के
चलते हम झारखंडवासियों को पूरे देश में शर्मसार होना पड़ता है|
· इसके अलावा हत्या के प्रयास के कुल
2862 मामले दर्ज किये गये हैं| इससे
साफ़ है कि इस सरकार में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब पुलिस
प्रशासन से डर नहीं लगता| हैरत
की बात है न कि आम आदमी पुलिस से घबराता है पर जिन्हें घबराना चाहिए, यानी कि अपराधी, वो अपराध करके खुले आम घूम रहे हैं|
· साल 2022 में हिट एंड रन के 2120 केस
दर्ज किये गये हैं| बताते
चलें कि पूर्व के वर्षों के मुकाबले ये संख्या भी बढ़ी है| दरअसल दुर्घटना होने पर पीड़ित को अस्पताल
पहुंचाने के बाद की औपचारिकताएं इतनी अधिक हैं कि एक आम आदमी अगर किसी को सड़क पर
तड़पते देखता भी है तो सोचता है कि इस झमेले में कौन फसें| सड़क दुर्घटनाओं को तो रोका नहीं जा सकता पर
पुलिसीय औत्चारिक्ताओं को कम या सरल कर के हिट एंड रन और इन सड़क दुर्घटनाओं से
होने वाली मौतों को कम ज़रूर किया जा सकता है|
· झारखंड में महिला से जुड़े अपराध भी अलग
चिंता का सबब बने हुए हैं| साल
2022 में ही दहेज उत्पीडन के 208 मामले दर्ज किये गये हैं| इन में करीब 11 प्रतिशत केसों में महिलाओं की
मृत्य हो गयी है| इतना
ही नहीं महिलाओं से रेप के 1298 मामले, महिलाओं से अभद्रता के 579 मामले और एसिड अटैक का भी एक मामला भी
संज्ञान में आया| इसके
अलावा 140 मामले यौन उत्पीडन के भी हैं| यहाँ ये भी गौरतलब है कि आम तौर पर इस तरह के केस लोकलज्जा के भय से
थानों तक पहुँचते ही नहीं हैं| ऐसे
में इन घटनाओं के वास्तविक आंकड़े सरकारी आंकड़ों से कई गुना अधिक हो सकते हैं|
· मौजूदा सरकार में अपराधियों का खौफ
इतना बढ़ गया है कि बच्चे तक सुरक्षित नहीं हैं| साल 2020 में बच्चों के खिलाफ अपराध के जहाँ
1795 मामले सामने आये थे, जो
कि 2022 में बढ़कर 1917 हो गये हैं| इनमें
से 65 बच्चे अभी तक लापता हैं| यहाँ
ये भी बताते चलें कि झारखंड में अपहरण के कुल 1899 मामले दर्ज किये गये हैं| इनमें से 35 मामले रंगदारी से सम्बंधित हैं|
· महिलाएं और बच्चे ही नहीं, आज के झारखंड में तो बुज़ुर्ग भी सुरक्षित नहीं
हैं| साल 2020 में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध
के 2 मामले सामने आये थे लेकिन ये संख्या साल 2022 में बढ़ कर 22 हो गयी|
झारखण्डवासियों को भयमुक्त करने के लिए इस तरह की आपराधिक घटनाओं पर
लगाम लगाना होगा| इसके
लिए ज़रूरी है कि सरकार निष्पक्ष रूप से कार्यवाही करे| पर यहाँ सवाल ये है कि प्रशासन और सरकार को
कुम्भकरण की इस गहरी नींद से जगाए कौन? मीडिया के प्रेशर से छीछालेदर होने अगर खानापूर्ति करने के लिए कुछ
होता भी है तो ये ड्रामा ज्यादा देर नहीं चलता बस कुछ दिन की खानापूर्ति कर मसले
को फ़ाइल डर फ़ाइल के बोझ के नीचे दबा दिया जाता है| झारखण्ड पुलिस प्रशासन के दफ्तर की मेज़ पर पड़ी
फाइलों के पन्नों में ऐसी जाने कितनी रूहें आज भी इन्साफ की आरज़ू लिए एक अपने
मुक्त होने का इंतजार कर रही हैं|
झारखंड में आपराधिक घटनाओं की निरंतर बढ़ती संख्या से साफ हो रहा है कि अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं। दिसंबर 2023 में झारखंड सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 में कुल 48,000 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें से महज 4,172 मामलों का ही निपटारा हुआ, जो कि एक चिंताजनक 10 प्रतिशत है। क्या इसे झारखंड पुलिस प्रशासन की सुस्ती कहा जाए?
हत्याओं के प्रयास के 2,862 मामलों से यह स्पष्ट है कि अपराधियों को अब पुलिस प्रशासन से कोई भय नहीं है। इस पर दुखद यह है कि आम आदमी पुलिस से डरता है, लेकिन अपराधी खुलेआम घूमते हैं।
2022 में हिट एंड रन के 2,120 मामले दर्ज किए गए, जो कि पूर्व वर्षों के मुकाबले बढ़ी है। दुर्घटनाओं के बाद की औपचारिकताएं आम लोगों को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकती हैं, जबकि सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए सरल प्रक्रियाओं की आवश्यकता है।
महिलाओं से संबंधित अपराध भी गंभीर चिंता का विषय हैं। दहेज उत्पीड़न के 208 मामले और 1,298 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए, जिनमें से कई मामलों में महिलाएं अपनी जान गंवा चुकी हैं। ऐसे मामलों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा भी खतरे में है। 2020 में बच्चों के खिलाफ 1,795 अपराध दर्ज हुए, जो 2022 में बढ़कर 1,917 हो गए। बुजुर्गों के खिलाफ अपराध की संख्या 2 से बढ़कर 22 हो गई है।
झारखंडवासियों को भयमुक्त करने के लिए आवश्यक है कि सरकार कठोर कदम उठाए। लेकिन सवाल यह है कि प्रशासन और सरकार को जागरूक करने के लिए कौन आगे आएगा? मीडिया का दबाव भी अक्सर समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं कर पाता। झारखंड पुलिस प्रशासन के दफ्तरों में पड़ी फाइलों में कई रूहें आज भी इंसाफ की तलाश कर रही हैं।
Jharkhand Government Fails Completely on Crime Front
**Government Fails to Control Criminals, Police Administration is Also Completely Ineffective**
The continuously increasing number of criminal incidents in Jharkhand clearly indicates that the confidence of criminals is soaring. According to figures released by the Jharkhand government in December 2023, over 48,000 criminal cases were registered in 2022. Out of these, only 4,172 cases were resolved, which is a concerning 10 percent. Should we call this the lethargy of the Jharkhand police administration?
The 2,862 cases of attempted murder make it evident that criminals now have no fear of the police administration. Tragically, the common person is afraid of the police, while criminals roam freely.
In 2022, there were 2,120 hit-and-run cases registered, which have increased compared to previous years. The formalities after accidents discourage ordinary people from intervening in such cases, while there is a need for simpler processes to control road accidents.
Crimes related to women are also a serious concern. There were 208 cases of dowry harassment and 1,298 cases of rape registered, with many of these cases resulting in women's deaths. The actual number of such incidents could be much higher than government statistics suggest.
The safety of children and the elderly is also at risk. In 2020, 1,795 crimes against children were reported, which increased to 1,917 in 2022. The number of crimes against the elderly rose from 2 to 22.
To ensure a fear-free environment for the people of Jharkhand, it is essential for the government to take strong measures. However, the question remains: who will come forward to awaken the administration and the government? Media pressure often fails to provide a permanent solution to these problems. In the offices of the Jharkhand police administration, many souls still await justice among the piled-up files.


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