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नहीं है किसानों का कोई खैरख्वाह

 

नहीं है किसानों का कोई खैरख्वाह

 

मत गोलियाँ मारो मुझे मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ

मेरी मौत की वजह यही है मैं पेशे से एक किसान हूँ

 

·       जनकवि अदम गोंडवी का ये शेर झारखंड के किसानों के मौजूदा हालात पर बिलकुल सटीक बैठता है| जो किसान अपने पूरे समाज का पेट भरता है झारखंड की निर्लज्ज सरकार आज उसी के मुँह से निवाला छीन रही है| कहने को तो झारखण्ड सरकार द्वारा किसानों के लिए कुल 82 योजनाएं चलाई जा रही हैं फिर भी किसानों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है| कहा जा सकता है कि ये सारी योजनाएं कागज़ी हैं जिनका ज़मीन पर कोई अस्तित्व नज़र नहीं आता|

 

·       आंकड़े बताते हैं कि झारखंड के कृषि विभाग ने कृषि क्षेत्र के लिए निर्धारित बजट का 80% व्यय कर दिया है| पर सवाल ये है कि ज़मीन पर ये लाभ क्यों नहीं दिख रहा| आखिर से राशि खर्च कहाँ पर हो रही| झारखंड के सभी 24 जिलों में 5000 टन क्षमता के कुल 25 बड़े कोल्ड स्टोरेज के लिए बजट आवंटित हुआ पर ज़मीनी हकीकत ये है कि ज़्यादातर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण अभी बस शुरू ही हुआ है| कुछ का तो अभी केवल ज़मीन आवंटन ही हुआ है|

 

·        साल 2021 में स्वीकृत 1262 तलाबों में से महज़ 700 के करीब तालाबों का काम पूरा हुआ है| जबकि बोरिंग की 3729 योजनाओं में से महज़ 1138 योजनाएं ही पूरी हुई हैं| इन योजनाओं के अमल में देरी का सम्बंधित विभागों के पास कोई जवाब नहीं है|

 

·        झारखंड सरकार पर लापरवाही का आरोप लगते हुए किसान कहते हैं कि सरकार बाज़ार मूल्य तय करने में देर करती है जिससे बिचौलियों की मनमानी बढ़ जाती है| इसके अलावा खाद, बीज की उपलब्धता न होने की या उस पर सरकारी सब्सिडी न मिलने की वजह से भी फसलें और किसान की आय दोनों प्रभावित होती हैं|

 

क्या हैं मुख्य मांगें

 

·       कई किसान संगठन समय समय पर पूरे राज्य को आकाल क्षेत्र घोषित करने की मांग करते रहते हैं पर झारखंड सरकार द्वारा उनकी माँग सुनी नहीं जाती|

 

·       इसके अलावा किसान राज्य फसल बीमा योजना की रुकी हुई किस्तों को जल्द से जल्द निर्गत करने की माँग कर रहे हैं|   

 

·       इसके अलवा मोटे अनाज के बीज सरकारी अनुदान पर दिए जाने की माँग किसान राज्य सरकार से कर रहे हैं|

 

·       किसान चाहते हैं कि पंचायत स्तर पर कैम्प लगा कर समय समय पर उनकी समस्याओं को सुना जाए| 

 

·       झारखंड की सरकार को चाहिए की केवल चुनाव में बड़े बड़े वादे करने की बजाए सरकार उन वादों पर अमल के विषय में भी योजना बनाए ताकि लाभार्थियों तक लाभ पहुँच सके|

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