नौकरी के
मुद्दे पर पस्त है वर्तमान सरकार
बिना सिफारिश मिले नौकरी बिन रिश्वत
हो काम
इसी को अनहोनी कहते हैं इसी का कलजुग
नाम
· युवाओं
को हर साल पांच साल नौकरी देने के झूठे वादों की सीढियाँ चढ़ कर झारखंड में सत्ता
की कुर्सी तक पहुंचे मौजूदा सत्ताधारी दल की असल नीयत तब सामने आई जब इन वादों पर
अमल की बारी आई| सोरेन बाबू वादे कर सत्ता तक तो पहुँच गये पर अब युवाओं के तीखे
सवालों का जवाब देते नहीं बन रहा|
· स्थिति
ये है कि झारखंड में बेरोज़गारी अपने चरम पर है| बावजूद इसके सरकारी कार्यालयों में
रिक्त पदों को भरा नहीं जा रहा| परीक्षाओं में देरी और धांधली से ये समस्या और
विकट होती जा रही है| रोज़गार जैसे अहम
मसले पर सत्ता की ख़ामोशी से उसके मंसूबों पर सवाल उठना लाज़मी है|
बेरोज़गारी की
जड़ ने झारखंड को लिया है जकड़
· सबसे
अधिक बेरोज़गारी के लिहाज़ से पूरे देश में झारखंड आज पांचवें स्थान पर है| झारखंड
में बेरोज़गारी की दर 18 प्रतिशत है| पिछले वर्षों के मुकाबले ये दर बढ़ी है| वहीं
अगर राष्ट्रीय बेरोज़गारी दर की बात करें तो ये आंकड़ा 8.30 फीसदी है| साफ़ है कि
राष्ट्रीय बेरोज़गारी दर के मुकाबले झारखंड में बेरोज़गारी की दर काफी अधिक है|
· बेरोज़गारी के इस दावन ने झारखंड के
युवाओं की उम्मीदों को खंड खंड कर दिया है| सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकोनोमी की
हालिया रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि ग्रामीण महिलाओं की अपेक्षा शहरी महिलाओं
में बेरोज़गारी की दर अधिक है| ग्रामीण महिलाओं में बेरोज़गारी की दर 5.1 फीसदी है
वहीँ शहरी महिलाओं में ये 11.5 फीसदी के करीब है|
रिकोर्ड़तोड़
बेरोज़गारी के बावजूद भरे नहीं जा रहे सरकारी पद
· झारखंड
में बेरोज़गारी के भयावह आंकड़ों के बीच सरकारी पदों का खाली रह जाना हैरतंगेज़ हैं|
आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में कुल 466494 सरकारी पद हैं जिसमें 287129 पद अभी भी
रिक्त हैं|
· राज्य
सरकार सिविल सेवा आयोग पिछले पांच वर्षों में केवल 1 ही सरकारी परीक्षा संपन्न करा
पाई है जिसमें महज़ 257 अफसरों की ही नियुक्ति हो पाई| झारखंड में बढती बेरोज़गारी
के बीच सरकार की ये कछुआ चाल समझ से परे हैं|
· इसके
अलवा नगरपालिका सेवा संवर्ग और कृषि पदाधिकारी समेत कई ऐसे पद हैं जिनकी या तो
परीक्षाएं अभी तक नहीं हुई हैं या फिर परिणाम अभी तक नहीं आए हैं|
· झारखंड
लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का पद भी बीते 22 अगस्त से रिक्त है| इसके अलावा 13
सिविल सर्विसेज की परीक्षाएं ऐसी हैं जिनकी मेंस परीक्षा हुए 2 माह से ज्यादा का
समय हो चुका है पर उनके परिणाम अभी तक जारी नहीं किये गये|
· हाल ही
में संपन्न हुई जेएसएससी सीजीएल परीक्षाएं भी सवालों के घेरे में है| जिसकी जांच
के लिए महामहिम राज्यपाल के आदेश पर जाँच कमेटी का गठन हो चुका है|
याद दिला दें कि आदिवासियों के हितैषी ने हर साल पांच लाख युवाओं को नौकरी
देने का वादा किया था और नौकरी न दे पाने के स्थिति में बेरोज़गारी भत्ते का वादा
किया था| वर्तमान में युवा ठगा सा महसूस कर रहे हैं| इन्हें न तो नौकरी ही मिली, न
ही बेरोज़गारी भत्ता|
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