झारखंड को इसाईलैंड बनाने की हो रही है साजिश
धर्म कोई भी बुरा नहीं हैं और न ही धर्म का प्रचार प्रसार बुरा है| पर एक धर्म विशेष को दूसरे से बेहतर बता कर, उसके खिलाफ लोगों को भड़का कर एक सोचे समझे
षड़यंत्र के तहत लोगों का धर्म परिवर्तन कराना, ये भी उचित नहीं है| हाल के वर्षों में पूरे देश सहित झारखंड में
असामान्य रूप से इसाइयत के बढ़ते प्रभाव से षड़यंत्र की बू आती हैं| खास तौर से झारखण्ड में आदिवासियों की कमज़ोर
आर्थिक स्थिति और विकास की मुख्यधारा से उनके कटे होने का लाभ उठाकर उनसे धर्म
परिवर्तन करना अपेक्षाकृत आसान है| आदिवासियों
की इस मजबूरी का लाभ उठा कर आदिवासियों को जबरन इसाई बनाया जा रहा है जो कि उचित
नहीं है|
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आदिवासियों के लगातार इसाई धर्म अपना लेने की वजह से झारखंड में
आदिवासी समुदाय के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है| प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में प्रस्तुतु है
देवरी प्रखंड का बेलाटांड इलाका जो आज से महज़ 4 दशक पहले आदिवासी बाहुल इलाके की
श्रेणी में आता था पर आज इए क्षेत्र में इसाई बहुसंख्यक हैं|
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झारखण्ड के गिरडीह ज़िले में दलित और आदिवासियों को धड़ल्ले से इसाई
बनाया जा रहा है| इसके
अलावा लिट्टीपाड़ा और हरिनपुर में रह रहे पहाड़िया समुदाय के 90 फीसदी से अधिक लोग
आज इसाई बन चुके हैं जिससे यहाँ की आदिवासी संस्कृति खतरे में है|
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इसी साल अप्रैल में झारखण्ड के अलकर से सटे गाँव तुलसीडामर गाँव में
एक साथ सौ लोगों मतान्तरण का मामला संज्ञान में आया| गाँव के 20 से 25 हिन्दू परिवार के करीब 100
लोगों को सुख समृद्धि का लालच देकर इसाई बना दिया गया|
कैसे चलता है प्रलोभन का ये खेल
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इसाई संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए मिशनरी सिस्टम पूरे देश में
काम करता है| इस सिस्टम की सक्रियता हाल के वर्षों
में झारखंड में लगातार बढ़ी है| हिन्दू
धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार करने के ख़ास तौर पर दलित और आदिवासियों को इसाई बनाया जा
रहा है| उदाहरण के लिए हिन्दू धर्म में निहित
जाति और वर्ण व्यवस्था का दुष्प्रचार कर दलितों को बरगलाया जाता है कि इसाइयत में
किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं है|
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ये लोग झारखंड के अतिपिछड़े इलाकों में जाकर वहां तरह तरह के राहत
कैम्प लगाकर, पैसे या राशन बांटकर या अन्य कई प्रकार
के प्रलोभन देकर भोले भाले आदिवासियों को इसाई बना लेते हैं| मिशनरियों की कई टीमें अलग अलग राज्यों में काम
करती हैं और अलग अलग तरीकों से इसाइयत का प्रचार करती हैं| पिछले वर्ष जून में झारखंड के गढ़वा ज़िले से
इसाई मिशनरियों से जुड़े 60 लोगों को गिरफ्तार किया है| ये लोग आँध्रप्रदेश के गुंटूर और बिहार के
मुंगेर ज़िले से यहाँ आए थे और टीकाकरण और स्वास्थ्य जागरूकता कैम्प की आड़ में पैसे
का लालच देकर आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करा रहे थे| खोजबीन करने पर इन लोगों के पास से इसाई धर्म
की पुस्तकें भी बरामद हुई थीं|
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इससे पहले साल 2018 में दुमका के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के
फूलपहाड़ी गाँव में गैरकानूनी तरीके से धर्म का प्रचार करते हुए कुल 16 इसाई
धर्मप्रचारकों को हिरासत में लिया था जिनमें 7 महिला धर्म प्रचारक भी शामिल हैं| ये लोग संथाल परगना और उसी से सटे पश्चिम बंगाल
के सीमावर्ती इलाकों के बताए गये थे| इनकी गाड़ियों से लाउडस्पीकर, माइक के साथ साथ इसाई साहित्य और कुछ आपत्तिजनक
धार्मिक पर्चे और पोस्टर भी बरामद किए गए थे|
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फूलपहाड़ी गाँव में कुल 72 संथाली आदिवासी परिवार रहते हैं| इनका आरोप है कि ये इसाई धर्म प्रचारक अपने
धर्म के प्रचार के लिए इन आदिवासियों के धर्म मांझी थान और जोहार थान, जो कि इनका पूजास्थल है, उसके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए कहते
हैं कि इन जगहों (जोहार थान) पर शैतान रहते हैं|
यहाँ ये भी गौरतलब है कि इन सारी घटनाओं पर नियंत्रण को लेकर झारखण्ड
सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है जिससे इस मसले पर सरकार का रुख
तय हो सके कि अमुक मुद्दे पर सरकार कितनी गंभीर है और इस तरह की घटनाओं को रोकने
के लिए भविष्य में क्या प्रयास किये जाएंगे|
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