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महिलाओं पर अत्याचार: समाज पर कलंक

 

महिलाओं पर अत्याचार: समाज पर कलंक

 

जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ खुलासा देखिये

आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये

 

जो बदल सकती है इस रुत के मौसम का मिज़ाज

यूँ ही बेसबब उस औरत के चेहरे की हताशा देखिये

 

झारखण्ड के कोने कोने से हर रोज़ आ रही महिलाओं की दर्दनाक चीत्कार की आवाजों से भी प्रदेश के मुखिया सोरेन साहब का दिल नहीं पसीज रहा| महिला सुरक्षा के मोर्चे पर सोरेन सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है| बावजूद इसके झारखण्ड मुक्ति मोर्चा 'हेमंत है तो हिम्मत है' का ढोल पीटने से बाज नहीं आ रही| हैरत की बात है कि झारखण्ड की बहन बेटियों के करुण क्रंदन की पुकार सरकार के कानों तक कैसे नहीं पहुँच रही है| सोरेन बाबू की आँखों पर बंधी तुष्टिकरण की हरी पट्टी ने उनके हाथ बाँध कर उन्हें तमाशबीन बने रहने पर मजबूर कर दिया है| कुर्सी और वोट की इस गणित के आगे सोरेन बाबू के सारे झूठे दावे ध्वस्त हो जाते हैं|

    झारखंड में महिलाओं के साथ हो रही इस बर्बरता की गवाही ये आंकड़े चीख चीख कर दे रहे हैं| मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखण्ड में हर रोज़ औसतन 4 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया जाता है| पिछले पांच सालों में पूरे झारखंड में महिलाओं से रेप के कुल 14162 मामले दर्ज हुए हैं| ज़िलेवार बात करें तो रांची में 1484, धनबाद में 1021, हज़ारीबाग में 967, गिर्डीह में 925, गढ़वा में 897, साहिबगंज में 872, जामताड़ा में 798, बोकारो में 762, जमशेदपुर में 740, पलामू में 704, गोड्डा में 669, गुमला में 605, चाईबासा में 497, देवघर में 446, लोहरदगा में 416, लातेहार में 384, पाकुड़ में 357, सिमडेगा में 323, दुमका में 318, रामगढ़ में 318, सरायकेला में 295, कोडरमा में 281, खूंटी में 237 बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं| इसमें से ज़्यादातर केस ऐसे भी हैं जिसमें बलात्कार के बाद महिला की निर्मम हत्या भी कर दी गयी|

     इन चौका देने वाले आंकड़े सोरेन बाबू के, झारखंड के तथाकथित विकास के दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं| साफ़ है कि पुलिस अपराधी प्रवित्ति के लोगों में अपना डर बैठा पाने में नाकाम रही है| लेकिन पुलिस की नाकामी यहीं ख़त्म नहीं होती| पुलिस रिकार्ड्स के मुताबिक ही बलात्कार के कुल 8000 ऐसे मामले हैं जिनकी छानबीन, डेडलाइन के बीत जाने के बाद भी अभी तक पूरी नहीं हुई है| सिमडेगा, जमशेदपुर और चाईबासा में केवल 50 प्रतिशत यानी आधे केसों की छानबीन ही पूरी हो पाई है| स्पेनिश महिला के साथ दुष्कर्म की वारदात से चर्चा में आए दुमका ज़िले में तो मात्र 9.55 फीसदी केस ही अदालत की दहलीज़ तक पहुँच पाए हैं| सोरेन साहब को चाहिए कि अपने पुलिस प्रशासन की इस भयंकर सुस्ती की सफाई दें| पिछले 5 साल में दर्ज हुए कुल 14162 में से 13814 मामले ऐसे हैं जिन्हें दर्ज हुए 2 महीने से ज्यादा का समय हो चुका है लेकिन मात्र 3803 मामले ही ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गयी है| झारखण्ड की जनता सोरेन साहब से ये जानना चाहती है कि क्या बाकी महिलाओं को इन्साफ का हक नहीं है? झारखंड की हमारी बहन बेटियों का भविष्य अन्धकारमय क्यूँ है? बताइए सोरेन बाबू| सरकार और पुलिस की सुस्ती का खामियाज़ा झारखण्ड की बहन बेटियों को अपनी इज्ज़त और जान देकर क्यों चुकाना पड़ रहा है|  

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