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कहीं सीबीआई जांच की आंच से राख ना हो जाए कुर्सी

 

कहीं सीबीआई जांच की आंच से राख ना हो जाए कुर्सी

 

 कहते हैं न कि ‘काजल की कोठरी में हाथ डालोगे तो हाथ तो काला होगा ही’। ये कहावत झारखंड सरकार के चरित्र पर चरितार्थ होती है। झारखंड सरकार ने तो कोयले की खादान में हाथ डाला और अपना मुँह काला करा लिया।

 

कैसे झारखंड सरकार की नाक के नीचे होता है अवैध खनन का ये खेल

*    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड से हर रोज़, अवैध कोयले की लगभग 530 ट्रक गुज़रते हैं। एक ट्रक में करीब 20 टन कोयला लोड होता है जिसकी कीमत बाज़ार में 6 हज़ार से 11 हजार रूपये प्रति टन होती है।

 

*    अगर कोयलों की कीमत 7 हज़ार प्रति टन भी मानें तो 1 ट्रक कोयले का बाज़ार मूल्य करीब 1.40 लाख हुआ। 530 ट्रक रोज़ के हिसाब प्रतिदिन करीब 7.5 करोड़ का अवैध कोयला इधर-उधर जाता है।

 

*    आंकड़ों के मुताबिक एक माह में करीब 1.5 अरब रूपये का कोयला चोरी होता है। इस चोरी पर लगाम लगाने को लेकर झारखंड सरकार का रवैया ‘कछुए की चाल’ वाला है।

 

*    वर्ष 2022 में झारखंड पुलिस ने कुल 823 छापेमारी की थी जिसमे मात्र साढ़े पांच करोड़ रूपये ही वसूल हो पाए थे।

 

*     ज़िलेवार देखें तो धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा और लातेहार में अवैध कोयले की तस्करी सबसे ज्यादा होती है। अवैध कोयला को स्थानीय प्लांट में भेजने से लेकर कोक भट्ठा, ईंट भट्ठा और जीटी रोड के रास्ते बनारस, पश्चिम बंगाल और बिहार में खपाया जाता है।

 

पुलिस प्रशासन की शह पर चल रहा अवैध खनन का खेल  

*    साल 2020 में सीबीआई की छापेमारी में कई ईसीएल अफसर, सुरक्षा अधिकारी, पुलिस अफसरों समेत नेताओं के नाम सामने आये थे। जांच में सामने आया कि ईसीएल के कुछ अफसरों ने रिपोर्ट दाखिल कर के चालू खदानों को बंद करा कर इन्हें बड़े बड़े कोयला तस्करों को बेच दिया गया।

 

*    सूत्र के मुताबिक़ केवल ये अवैध तस्करी के कोयले का एक बड़ा हिस्सा बाज़ार मूल्य से कम दामों में बोकारो के चास स्थित हार्डकोक भट्ठों में खपता है  केवल इन जैसे भट्ठों में ही प्रतिमाह 30 से 35 हज़ार टन कोयले की खपत होती है।

 

 

*    अवैध तस्करी के इस कोयले को झारखंड सीमा से पार कराकर दूसरे राज्यों में दाखिल कराने में राज्य की पुलिस की बड़ी रही भूमिका है। प्रति माह हो रहे कोयले के अवैध खनन के आंकड़े और उसके सापेक्ष पुलिस की जब्ती में लंबा-चौड़ा अंतर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है। 

 

कोयला तस्करों का सॉफ्ट टार्गेट होती हैं ‘बंद पड़ी खदानें’

*   आंकड़ों के मुताबिक देश में कोयले की कुल 132 बंद खदानें हैं जिनमें से 60 फीसदी खदानें झारखंड और पश्चिम बंगाल में स्थित हैं।

 

*   खदान के बंद होते ही प्रशासन वहां से अपना बोरिया बिस्तर हमेशा के लिए उठा लेता है और दोबारा मुड़कर नहीं देखता। इसका फायदा उठाकर वहां खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं और धडल्ले से अवैध खनन करते हैं।

 

*   आंकड़ों के मुताबिक कोयला चोरी, अवैध खनन और तस्करी की 90 फीसदी घटनाएं झारखंड और पश्चिम बंगाल में ही होती हैं।      

 

*   इनमें सबसे ज्यादा खनन कोकिंग कोल के लिए होता है क्योंकि लोहे के लघु एवं मध्यम उद्योग में कोकिंग कोल की माँग सबसे अधिक होती है। उत्तरप्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में झारखंड के कोयले की काफी माँग होती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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किस्मत का राजा

*    पिताजी का नाम इस्तेमाल कर सत्ता हासिल करो/ विरासत में सत्ता

*    खुद को आदिवासियों का हितैषी साबित करो/ स्वघोषित आदिवासी हितैषी

*    हर साल पांच लाख नौकरियों का झूठा वादा करो/ पसंदीदा खेल - युवाओं के भविष्य से खेलना

*    चोर चोर मौसेरे भाई वाली रणनीति के तहत कांग्रेस आदि दलों से गठबंधन   

*    धार्मिक तुष्टिकरण जिंदाबाद

*    बांग्लादेशी घुसपैठियों का खामोश रहो

*    घटती आदिवासी जनसँख्या पर आँखें मूँद लो

*    नौ सौ चूहे खा के बिल्ली हज को चली/ इसके बावजूद अबुआ राज का आभार जताओ

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