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dipawali ki shubhkamnaye

दीप पर्व……*

चलो किसी के आँसू पोंछे,*अधरों से सिसकी को नोचें,जहाँ तमस फैला हो घर में,वहाँ दिया एक ले कर पहुँचे। अपने घर की थोड़ी आभा,किसी अंधेरे घर को सौंपे,बाँटे किसी हृदय की पीड़ा,*अधरों को मुस्कानें सोंपे* चार फुलझड़ी हम कम लायें,चार दिये घर पर कम लायें,*किसी उपेक्षित से आँगन में**चार दीप सुख के ले जाए*जिस घर में निस्तब्ध मौन हो,मुखड़े पर छायी हो काली,*चलो चलें फुलझडियां लेकर**उस आँगन में करें दीवाली* मेरी ओर दीपोत्सव पर्व की हार्दिक मंगलकामनाएं


 Festival of lights……*
Let's wipe someone's tears,*Let's wipe away the sobs from our lips,Wherever darkness has spread in the house,Let's take a diya there.Let's give a little glow of our house,To some dark house,Let's share the pain of some heart,Let's entrust smiles to the lips*Let's bring four fewer sparklers,Let's bring four fewer lamps at home,*Let's take four lamps of happiness to some neglected courtyard*The house where there is silent silence,The face is covered with darkness,*Let's go with sparklers*Let's celebrate Diwali in that courtyard*My heartfelt best wishes for the festival of lights

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